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बरसाना का इितहास

वृ =दावन म रस कहाँ से आया ? वृ =दावन म रस आया बरसाना से |


बरसाना म रस कहाँ से आया ? बरसाना म रस आया, ÷ी राधा रानी के चरण| से |

ये सभी जानते ह Íक राधा रानी का गाँव बरसाना है और यहाँ आने के िलए ÷ी
कृ *ण भी तरसा करते ह | बहत

लोग इस बात को नह|ं समझ पाते ह | जो सबसे
üधान ÷ी राधा रानी जी का T=थ राधा सु धा िनिध है , उसम बरसाना क| ह| वंदना
क| गई है | रिसक लोग कहते ह Íक राधा रानी को üणाम करने क| यो¹यता तो
हमम नह|ं है | उनके ÷ी चरण| को अनंत कोÍट ü(ाÞड नायक भगवान ÷ी कृ *ण
भी छने ू म Íहचकते ह और बड़े भय से उनके चरण| को छते ू ह |
जब वो ÷ी जी के चरण छने ू जाते ह तो वो üेम से हं कार

करती ह | तो रिसक
?याम डर जाते ह Íक कह|ं ऐसा ना हो लाड़ली जी मान कर ल | इसीिलए भयभीत
होकर पीछे हट जाते ह | उन चरण| से ह| जो सरस रस Íबखरा उस रस को पाकर
के गोपीजन ह| नह|ं 1वयं ÷ी कृ *ण भी ध=य हए

| Íबहार| जी के üकटकता 1वामी
हÍरदास जी िलखते ह Íक (ता ठाकु र को ठकु राई -----) | वो बोले Íक ये मत
समझना Íक बांके बीहार| जी सव|¯चपित ह | सब ठाकु र| के ठाकु र ये बां के बीहार|
ह | लेÍकन इनक| भी ठकु राइन ह ÷ी राधा रानी | हम उस गाँव म बै ठे ह |
अब बरसाना का थोड़ा सा इितहास भी सुन लो, जो आपने कभी नह|ं सु ना होगा |
सूय वं शी महाराज Íदलीप हए

| वो बड़े गौ भñ थे | राधा रानी सूय वं शी थीं |
राम जी भी सूय वंशी थे | इनक| पर¹परा इस üकार है | महाराज Íदलीप तक तो
एक ह| वं श आता है | Íदलीप ने गाय क| भÍñ क| 4य|Íक उनको कामधे नु गाय
का ÷ाप था |
ये जब एक बार 1वग म गये थे तो ज~द|-ज~द| म गाय को üणाम करना भूल
गए थे | कामधेनु ने ÷ाप Íदया Íक तु म पु³ क| इ¯छा से जा रहे हो तु ¹ह पु³ नह|ं
होगा | ये ÷ाप उस समय Íदलीप सुन नह|ं सके थे 4य|Íक आकाश म इं 5 का
ऐरावत हाथी H|ड़ा कर रहा था | द|घका ल तक भी üयH करने पर उनको जब पु ³
क| üािB नह|ं हई

तो गु ³ विश8 के पास गए |
उ=ह|ने ºयान करके बताया Íक राजन तु ¹ह तो ÷ाप है | तु ¹ह पु³ कभी हो ह| नह|ं
सकता | ये अमोघ ÷ाप है कामधे नु गाय का | विशP जी ने कहा Íक तु म गाय सेवा
करो | कामधे नु क| लड़क| हमारे पास है वो भी कामधे नु है | िसफ वह| इस ÷ाप को
नP कर सकती है | Íदलीप ने अ{त ु सेवा क| | इनक| पर|Hा भी हई

| पर|Hा म
िसंह ने आHमण Íकया और Íदलीप ने अपना शर|र िसंह को दे Íदया | िसंह बोला
Íक म पाव ती से िनयुñ िसंह हँ

, तु म इस साधारण गाय के िलए अपना शर|र 4य|
नP करते हो ? जीÍवत रहोगे तो अनेक तरह क| तप1या आÍद कर सकोगे |
उ=ह|ने कहा Íक ये शर|र जीÍवत रखने से कोई लाभ नह|ं अगर हम गाय को नह|ं
बचा सकते | इससे तो मर जाना अ¯छा है | मनु*य को उतनी ह| दे र जीना चाÍहए
जब तक मशाल क| तरह उस म üकाश हो | अगर üकाश न रहे तो जीने से कोई
लाभ नह|ं | उससे अ¯छा है मर जाना | िसंह ने कहा तो Íफर तै यार हो जाओ मरने
के िलए | वो तै यार हो गए | िसंह आकाश म ऊपर उछला पर ये िसर नीचे करके
बैठ गए | Íहले नह|ं Íक िसंह हमारे ऊपर üहार करे गा | तब तक 4या दे खते ह Íक
एक फू ल| क| माला आकाश से उनके ऊपर आकर पड़ गयी |

उ=ह|ने सामने दे खा तो गाय मु1करा रह| थी | बोली म ने तु ¹हार| पर|Hा ली थी |
तु म इसम पास हो गये हो | जाओ मेर| माँ का ÷ाप िमटता है | तु ¹हारा पु³ होगा
बड़ा üतापी | उनका नाम रघु होगा | उस गौ सेवा को दे ख करके राजा Íदलीप के
लडक| म से जो धम नाम के सबसे छोटे लड़के थे उ=ह|ने कहा Íक हम रा7य नह|ं
चाÍहए | हम कु छ नह|ं चाÍहए | हम तो िसफ गाय क| सेवा कर गे |

उसी वं श म आगे चलकर अभय कण हए

| श³ु ¯न जी जब üज म आये तो अभय
कण को साथ लाये 4य|Íक ये भी बड़े गाय भñ थे | श³ु¯न जी जानते थे Íक ये
भू िम गाय के लायक है | वा~मीÍक रामायण म एक üसं ग आता है Íक जब सीता
जी वनवास के समय यमु ना जी को पार कर रह| थीं, तो जब यमुना जी को पार
करते समय सीता जी ने यमु ना जी क| वं दना Íकया | उ=ह|ने दे ख िलया Íक ये
यमु ना üज से आ रह| ह | वहाँ Hोक है ( कािलंद| --- üितवाcम ) सीता जी ने
कहा Íक हे माँ म ते र| हजार| गाय| से सेवा क³ँ गी | सीता जी भी üज भñ थीं |

जब अभय कण जी यहाँ आये तो बड़े üस=न हए और

गाय सेवा करने लग गए |
इसीिलए रघुवंश का ये एक अलग वंश आता है | इ=ह|ं के वं श म रशंग जी हए


Íज=ह|ने बरसाना बसाया है और इ=ह|ं के वंश म राधा रानी होती ह | ये बरसाने का
इितहास है | रशंग जी के वं श म ह| राजा वृ षभानु और राधा रानी हई

ह | ये
सूय वं शी थीं और ÷ी कृ *ण चं5वं शी थे |
महारानी क|ित जी ध=य ह Íजनके यहाँ राधा रानी ज=मी |

महारानी क|ित मानवीय क=या नह|ं ह , इनका अवतार हआ

है | Íकसी समय म
अपने पूव ज=म से पहले ये तीन Íपतर| क=याये थीं | ये कथा िशव पु राण म
आती है | जब ये शवेत द|प गयीं तो वहाँ सनकाÍद आये | इ=ह|ने उठकर स¹मान
नह|ं Íकया तो उ=ह|ने ÷ाप Íदया Íक तु म जाओ मानवी बन जाओ | भगवान ने
कहा Íक ये वरदान है , ÷ाप नह|ं है | तु ¹ह िनcय शÍñ को ज=मने का अवसर
िमले गा | वो तीन| क=याओं म से एक सीता जी क| माँ बनी, सुनै ना, एक पाव ती
जी क| माँ बनी, नैना और एक रािधका जी क| माँ बनी, कलावती | ये कलावती के
Fप म üगट हई

थीं | महाराज सुिच=5 क| Uी बनीं |
दोन| ने बड़ा तप Íकया | ü(ा जी आये और उ=ह|ने कहा Íक वरदान मांगो |
महाराज सुिच=5 जी ने कहा Íक हम मोH मांगते ह | ü(ा जी ने ये वरदान दे
Íदया | कलावती जी बोली Íक ü(ा म तु मको ÷ाप दे दं गी ू | तु मने मेरे रहते इनको
4य| मोH Íदया | ü(ा जी घबरा गए 4य| Íक ये महासती व अवतार थीं | वो बोले
Íक ठ|क है , ये कु छ Íदन तक यहाँ ऊपर रह गे और Íफर तु मको गोलो+वर| क| माँ
बनने का सौभा¹य िमले गा | ये तु ¹हारे साथ ह| धाम म जायगे | वो ह| महाराज
सुिच=5 और वह| कलावती Íफर से यहाँ üगट हए

| कलावती, क|ित ह(

और
इनक| कोख म राधा, भाद| म अPमी क| ितिथ को, आयीं |