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भानु गढ़ - राधा रानी का महल

÷ी जी के मंÍदर म दश न करके ये म=³ बोला जाता है |



राधा कृ ण दश न ाथ ना म
नम: Íüयायै राधायै ü(ण| वरदा ियने
सव P फल र¹याय राधा कृ *णाय मूतये !

इस म=³ का अथ है Íक राधा रानी Íüया जी को नम1कार है और ü(ा को वर
दे ने वाले ÷ी कृ *ण को नम1कार है | यहाँ पर सब इP फल üाB हो जाते ह ÷ी
राधा कृ *ण के दशन से | ü(ा जी के तप के बारे म हम बता चुके ह Íक ü(ा जी
÷ी जी के चरण| का रज पाने के िलए यहाँ पव त बने | भागवत म आता है ( तद
भूिम --- Íवशे ³तम ) Íक ü(ा जी चाहते थे Íक üज के Íकसी भी िनवासी का रज
िमल जाए | उसका रज, Íजसका जीवन ह| भगवान ह | ÷ु ितयाँ आज तक Íजन
चरण| क| रज को ढं ढ़ ू रह| ह वो ह| रज ü(ा जी को ÷ी कृ *ण क| कृ पा से िमली |
तो यहाँ कहा गया है Íक Íज=ह|ने ü(ा जी को वर Íदया उन ÷ी कृ *ण को üणाम है
और राधा कृ *ण क| मूित को üणाम है |

भानु गढ़ पर महाराज वृ षभानु जी का महल बना | यहाँ सबसे पहले राधा रानी ने
कहा था ?याम सु=दर से (तcव| गम --- वृ षभानु गढ़) | इस Hोक से बरसाने
क| मÍहमा का पता चलता है | ÷ी जी ने ?याम सु =दर से कहा Íक हमारे Íपता के
गाँव का नाम वृ षभान है | इसके तीन नाम ह | एक तो बरसाना, जहाँ रस बरसा
करता है | आज भी यहाँ रस बरसता रहता है | ऐसी छठा üज म कह|ं नह|ं होगी |
दसरा ू नाम है वृ षभानपुर | तीसरा नाम है बरसानु - जहाँ ÷े 8 पव त| क| चोÍटयाँ ह |




÷ी जी बोलीं Íक हमारे Íपता के इस गाँव म तु म मेरे साथ यहाँ रहा करो | इससे
ü(ा भी कृ ताथ हो जाय गे और मेर| भी üीित बढ़े गी | इसिलए यहाँ पर ÷ी जी के
मंÍदर म ठाकु र जी भी रहते ह | य²Íप चूनर ओढ़ा दे ते ह , सखी वेष म रहते ह
ताÍक कोई जान ना पावे | महाcमा लोग कहते ह Íक ऐसा संसार म कह|ं नह|ं है
जहाँ कृ *ण सखी वेश म रहते ह | जो पूण पु³षोdम पु³ष सखी बने ऐसा के वल
बरसाने म है |